हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि का बहुत अधिक महत्व होता है। हर माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत और चतुर्दशी तिथि पर शिवरात्रि पड़ती है। फाल्गुन माह में पड़ने वाली शिवरात्रि का महत्व सबसे अधिक होता है। इस दिन माता पार्वती और शिवजी का विवाह हुआ था। प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की विशेष अराधना की जाती है। फालगुन माह में प्रदोष व्रत और शिवरात्रि एक ही दिन यानी 8 मार्च को है। प्रदोष व्रत उदायतिथि के नियमानुसार रखा जाता है और शिवरात्रि में रात्रि पूजा का महत्व होता है, जिस वजह से प्रदोष व्रत और शिवरात्रि एक ही दिन पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि और प्रदोष व्रत का संयोग बेहद शुभ और खास होता है।
सनातन धर्म के अनुसार प्रदोष और शिवरात्रि का संगम होने से मनुष्य के जीवन में सुख शान्ति की अमृत की वर्षा होती है। इस पावन दिन गृहस्थ जीवन को प्रेम, सौहार्द, समन्वय, सामंजस्य के लिये 5-5 बेलपत्र पति-पत्नी को भगवान शिव पर चढ़ाना चाहिए।