दीदी की ममता बंगाल की जनता के साथ नहीं अपराधियों के साथ है : योगी आदित्यनाथ

पश्चिम बंगाल(कोलकाता),मंगलवार 30 अप्रैल 2024

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आसनसोल में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को जनता की नहीं अपराधियों की चिंता सताती है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिस बंगाल के स्वामी विवेकानंद ने वैश्विक मंच पर कहा था कि गर्व से कहो हम हिंदू हैं, आज उसी बंगाल में जयश्रीराम बोलने पर प्रतिबंध लगाया जाता है। जिस बंगाल ने बांग्ला रामायण लिखा था, आज वहां जयश्रीराम कहने पर गोली चलाई जाती है। शोभायात्रा पर हमले कर दिए जाते हैं। सरकार की ओर से झूठे मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। पूरे देश को संस्कृति, कला व संस्कारों की सीख देने वाली बंगाल की भूमि में आज संदेशखाली की घटना होती है और तृणमूल सरकार अपराधी को बचाने का कार्य करती है। उपद्रवियों के सामने पूरी तृणमूल सरकार मौन है। ममता दीदी की ममता जनता नहीं, बल्कि अपराधियों के साथ है। बंगाल की परिस्थितियों से हर भारतवासी चिंतित है। उन्होंने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में तीसरी जनसभा आसनसोल लोकसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार एसएस अहलूवालिया के पक्ष में की।

सीएम योगी ने कहा कि बंगाल को भी यूपी जैसा मॉडल चाहिए। जब कोठारी बंधू बलिदान हुए थे तो अंतिम समय भी उन्होंने नारा लगाया कि रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। नाम भले अलग हैं, लेकिन लूट, अराजकता, भ्रष्टाचार में कांग्रेस, तृणमूल व कम्युनिस्ट एक हैं। बस लूटने के तरीके इनके अलग हैं। तीनों पर विश्वास नहीं करना है। उन्होंने कहा कि बंगाल अब सोनार बंग्ला नहीं रहा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अपील की कि सोनार बांग्ला के लिए मोदी जी के नेतृत्व में वोट देना है। उन्होंने सुरक्षित व समृद्ध बंगाल की वकालत की। अयोध्या की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि तब और अब की अयोध्या में काफी अंतर आ गया है। जैसी अयोध्या लगती है, वैसे ही बंगाल को बनाना है।

यूपी सीएम ने कहा कि जिन कारणों से 1947 में मजहब के आधार पर देश का विभाजन हुआ था। बंगाल के अंदर कांग्रेस व तृणमूल के लोग फिर से उसी परिस्थिति को पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। बीरभूम में सात में से तीन असेंबली की डेमोग्राफी बदल गई है। वहां रामनवमी के जुलूस पर हमले होते हैं। योगी ने कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन में बंगाल के कोठारी बंधुओं ने खुद को बलिदान किया था।

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