सीटू उपाध्यक्ष राजशेखर बोले, प्रभावी योजनाओं-नीतियों पर करें कार्य, बढ़ाएं आर्थिकी

उत्तराखंड(देहरादून),गुरुवार 11 जुलाई 2024

राज्य योजना आयोग (सीटू) के उपाध्यक्ष राजशेखर जोशी की अध्यक्षता में बुधवार को मंथन सभागार में समीक्षा बैठक हुई। इसमें विभागीय कार्ययोजना, विशेष प्रोजेक्ट, गत वर्ष की जिला योजना की प्रगति परखी गई।

उपाध्यक्ष ने कहा कि किसी योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए पूर्व आंकड़ों के दृष्टिगत विभागों का आंकड़ा रेखीय विभागों को एक ही प्लेटफार्म पर दिखे, इस कार्ययोजना पर कार्य करने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि जनपदों की आर्थिक स्थिति बढ़ाने के लिए प्रभावी योजनाओं—नीतियों पर कार्य करने की आवश्यकता है।

उपाध्यक्ष ने विभागवार योजना की समीक्षा करते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि योजना के क्रियान्वयन में जिला प्रशासन की महत्पूर्ण भूमिका होती है। इसके लिए जिला स्तरीय विभागीय अधिकारियों का योजनाओं के क्रियान्यन में सक्रिय होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि योजना के क्रियान्वयन के संबंध में जनपद की मजबूती एवं कमजोरी दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर कमजोर पहलुओं में सुधार करते हुए योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाना आश्यक है।

युवाओं को कौशल विकास से जोड़ें, प्रशिक्षित कर स्वरोजगार को दें बढ़ावा

उन्होंने शहरी क्षेत्रों एवं ग्रामीण क्षेत्रों ड्रेनेज सिस्टम, अपशिष्ट प्रबंधन की जानकारी लेते हुए बेहतर कार्ययोजना पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएं। साथ ही स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए युवाओं को कौशल विकास से जोड़ते हुए प्रशिक्षण दिए जाएं।

योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही दिक्कतें बताई

मुख्य विकास अधिकारी झरना कमठान ने योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आ रही दिक्कतों एवं ध्वजवाहक योजनाओं के संचालन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। बैठक में राज्य योजना आयोग के निदेशक डॉ मनोज पंत, पुलिस अधीक्षक यातायात मुकेश कुमार, ग्राम्य विकास अभिकरण निदेशक विक्रम सिंह, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी शशिकांत गिरि, मुख्य चिकित्साअधिकारी डॉ. संजय जैन, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, जिला पंचायतीराज अधिकारी विद्या सिंह सोमनाल, जिला पर्यटन विकास अधिकारी सुशील नौटियाल, अधिशासी अभियंता सिंचाई राजेश लाम्बा, अधिशासी अभियंता जल संस्थान राजेंद्र पाल आदि थे।

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