भारत ने निकाल लिया मालदीव का तोड़, 130 किलोमीटर दूर खोला नौसैनिक अड्डा

चीन की गोद में जा बैठे मालदीव के बेहद करीब भारत ने अपना नौसैनिक अड्डा शुरू कर दिया है। यहां से भारतीय नौसेना समुद्री सुरक्षा को लेकर और भी कड़ा पहरा दे पाएगी। गौरतलब है कि भारत विशाल हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति और पहुंच को बेहद मजबूत करने में जुटा है। यही वजह है कि भारतीय नौसेना ने बुधवार को लक्षद्वीप के मिनिकॉय द्वीप पर अपने नए अड्डा आईएनएस जटायु की शुरुआत की है। यह अड्डा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लक्षद्वीप द्वीपों के भीतर उसकी परिचालन क्षमताओं को बढ़ाएगा। इसके अलावा, यह मालदीव के बेहद करीब है। लक्षद्वीप मालदीव से करीब 130 किलोमीटर दूर उत्तर की तरफ स्थित है।

इस अड्डे से नौसेना टुकड़ी की परिचालन पहुंच बढ़ेगी और यह पश्चिमी अरब सागर में समुद्री डकैती और ड्रग्स रोधी अभियानों में भारतीय नौसेना के प्रयासों में सहयोग करेगा। नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने यहां आयोजित एक समारोह में नए अड्डे की शुरुआत की। आईएनएस जटायु को कमांडेंट व्रत बघेल की कमान में शामिल किया गया है। इस नवल बेस का नाम हिंदू महाकाव्य रामायण में एक विशाल पक्षी के नाम पर रखा गया है। रमायाण के मुताबिक, जब रावण सीता का हरण करके लंका ले जा रहा था तो जटायु ने सीता को रावण से छुड़ाने का प्रयत्न किया था। इससे पहले तक नौसेना के पास मिनिकॉय में एक अस्थायी अड्डा था जिसे अब पूर्ण बेस के रूप में चालू कर दिया गया है।

नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने मिनिकॉय में कहा कि नए बेस का चालू होना न केवल भारतीय नौसेना के लिए, बल्कि देश की समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक स्थिति के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। कुमार ने कहा, ‘‘रामायण में जटायु ने सबसे पहले कदम उठाते हुए सीता जी के अपहरण को रोकने की कोशिश की। अपने जीवन को खतरे में डालकर, स्वयं से पहले सेवा का उदाहरण दिया। इसलिए इस इकाई का नाम जटायु रखना सुरक्षा निगरानी और निस्वार्थ सेवा प्रदान करने की भावना की एक उपयुक्त मान्यता है।’’ नौसेना प्रमुख ने कहा कि जटायु द्वारा भगवान राम को दी गई जानकारी से हालात का पता चला और आगे विजयी हुए।

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