राज्यपाल ने पुस्तक ‘एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस’ और ‘प्रज्ञा’ का किया विमोचन

उत्तराखंड(देहरादून),मंगलवार 07 जुलाई 2026

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने मंगलवार को लोक भवन में अपनी पुस्तक ‘एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस’ और उसके हिन्दी संस्करण ‘प्रज्ञा’ का विमोचन किया। पुस्तकों का सहलेखन प्रो. अरुण तिवारी ने किया है, जबकि ‘प्रज्ञा’ का हिन्दी रूपांतरण पारितोष बंगवाल ने किया है।

पुस्तक विमोचन समारोह में स्वामी चिदानन्द सरस्वती, आचार्य बालकृष्ण और वर्चुअल माध्यम से प्रो. अरुण तिवारी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के नए युग में प्रवेश कर चुका है और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी अभूतपूर्व गति से मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक कभी भी मानवता का विकल्प नहीं बन सकती। उसका उद्देश्य मनुष्य पर शासन करना नहीं, बल्कि जीवन को अधिक सुरक्षित, सरल, समृद्ध और कल्याणकारी बनाना है।

उन्होंने कहा कि विज्ञान जब आध्यात्मिकता से, नवाचार नैतिकता से और बुद्धिमत्ता प्रज्ञा से जुड़ेगा, तभी मानव सभ्यता का संतुलित एवं सतत विकास संभव होगा। उनके अनुसार यही दोनों पुस्तकों का मूल संदेश है।

राज्यपाल ने कहा कि इन पुस्तकों के लेखन का उद्देश्य कोई नया सिद्धांत प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि जीवन के उन अनुभवों को साझा करना है, जिन्होंने उन्हें सिखाया कि प्रत्येक चुनौती अपने भीतर समाधान का बीज लेकर आती है। आवश्यकता ऐसी दृष्टि विकसित करने की है, जो समस्या नहीं बल्कि समाधान पर विश्वास करे।

उन्होंने विश्वास जताया कि ‘एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस’ और ‘प्रज्ञा’ विज्ञान, आध्यात्मिकता, नैतिकता और मानवीय मूल्यों के समन्वय पर गंभीर चिंतन के लिए पाठकों को प्रेरित करेंगी और उन्हें जीवन में सकारात्मक दिशा प्रदान करेंगी।

राज्यपाल ने अन्य अतिथियों के साथ लोक भवन परिसर में आयोजित पुस्तक प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए राज्यपाल ने विभिन्न प्रकाशनों की विषय-वस्तु, उद्देश्य और उपयोगिता की जानकारी ली तथा ज्ञान के प्रसार, शोध, नवाचार और समाजोपयोगी साहित्य के सृजन में उनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास ज्ञान-संस्कृति को समृद्ध करने के साथ-साथ युवाओं को अध्ययन, अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित करते हैं।

कार्यक्रम में राज्यपाल के सचिव रविनाथ रामन, विधि परामर्शी कौशल किशोर शुक्ल, अपर सचिव रीना जोशी, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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